Hindi Essays On Republic Day 2016

On By In 1

भारत के लोगों के लिये गणतंत्र दिवस एक महत्वपूर्णं दिन है इसलिये हम इसे हर साल 26 जनवरी 1950 से मना रहे है। चलिये, इस निबंध के द्वारा हम अपने बच्चों को इससे जुड़े इतिहास के बारे में अवगत कराते है। ये बेहद आसान शब्दों में लिखा गया है जिसे बच्चे आसानी से समझ सकेंगे साथ ही अभिवाहकों को ये इंटरनेट पर विभिन्न शब्द सीमा के साथ उपलब्ध होगा।

भारतीय गणतंत्र दिवस पर निबंध (रिपब्लिक डे एस्से)

You can get here some essays on Republic Day in Hindi language for students in words limit of 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

गणतंत्र दिवस पर निबंध 1 (100 शब्द)

26 जनवरी 1950, पूरा भारतवर्ष हर साल इस दिन को बड़े धूमधाम से मनाता है क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी 1950 के इस खास दिन पर भारतीय संविधान ने शासकीय दस्तावेजों के रुप में भारत सरकार के 1935 के अधिनियम का स्थान ले लिया। भारत सरकार द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। भारत के लोग इस महान दिन को अपने तरीके से मनाते है। इस दिन पर भारत के राष्ट्रपति के समक्ष नई दिल्ली के राजपथ (इंडिया गेट ) पर परेड का आयोजन होता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध 2 (150 शब्द)

जब पहली बार भारत को अपना संविधान मिला तब से भारत हर साल 26 जनवरी 1950 से गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा है भारतीय इतिहास में गणतंत्र दिवस का बहुत महत्व है क्योंकि ये हमें भारतीय स्वतंत्रता से जुड़े हर-एक संघर्ष के बारे में बताता है। भारत की पूरी आजादी (पूर्णं स्वराज) की प्राप्ति के लिये लाहौर में रावी नदी के किनारे 1930 में इसी दिन भारत की आजादी के लिये लड़ने वाले लोगों ने प्रतिज्ञा की थी। जो 15 अगस्त 1947 को साकार हुआ।

26 जनवरी 1950 को, हमारा देश भारत संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, और लोकतांत्रिक, गणराज्य के रुप में घोषित हुआ अर्थात भारत पर खुद का राज था उस पर कोई बाहरी शक्ति शासन नहीं करेगी। इस घोषणा के साथ ही दिल्ली के राजपथ पर भारत के राष्ट्रपति के द्वारा झंडा फहराया गया साथ ही परेड तथा राष्ट्रगान से पूरे भारत में जश्न का माहौल शुरु हो गया।

गणतंत्र दिवस पर निबंध 3 (200 शब्द)

गणतंत्र दिवस को 26 जनवरी भी कहा जाता है जो कि हर साल मनाया जाता है ये दिन हर भारतीयों के लिये मायने रखता है क्योंकि इसी दिन भारत को एक गणतांत्रिक देश घोषित किया गया था साथ ही आजादी के लंबे संघर्ष के बाद भारतीयों को अपनी कानूनी किताब ‘संविधान’ की प्राप्ति हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और इसके ढ़ाई साल बाद ये लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में स्थापित हुआ।

आजादी के बाद एक ड्राफ्टिंग कमेटी को 28 अगस्त 1947 की मीटिंग में भारत के स्थायी संविधान का प्रारुप तैयार करने को कहा गया। 4 नवंबर 1947 को डॉ बी.आर.अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के प्रारुप को सदन में रखा गया। इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग तीन साल का समय लगा और आखिरकार इंतजार की घड़ी 26 जनवरी 1950 को इसको लागू होने के साथ ही खत्म हुई। साथ ही पूर्णं स्वराज की प्रतिज्ञा का भी सम्मान हुआ।

भारत में गणतंत्र दिवस का दिन राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है जब इस महान दिन का उत्सव लोग अपने-अपने तरीके से मनाते है, जैसे- समाचार देखकर, स्कूल में भाषण के द्वारा या भारत की आजादी से संबंधित किसी प्रतियोगिता में भाग लेकर आदि। इस दिन भारतीय सरकार द्वारा नई दिल्ली के राजपथ पर बहुत बड़ा कार्यक्रम रखा जाता है, जहाँ झंडारोहड़ और राष्ट्रगान के बाद भारत के राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गेट पर भारतीय सेना द्वारा परेड किया जाता है।


गणतंत्र दिवस पर निबंध 4 (250 शब्द)

हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इसे हम सभी राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाते है और इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। इसके अलावा गाँधी जयंती और स्वतंत्रता दिवस को भी राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। भारतीय संसद में भारत के संविधान के लागू होते ही 26 जनवरी 1950 को हमारा देश पूरी तरह से को लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।

इस महान दिन पर भारतीय सेना द्वारा भव्य परेड किया जाता है जो सामान्यत: विजय चौक से शुरु होकर इंडिया गेट पर खत्म होता है। इस दौरान तीनों भारतीय सेनाओं (थल, जल, और नभ) द्वारा राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है साथ ही सेना द्वारा अत्याधुनिक हथियारों और टैंकों का प्रदर्शन भी किया जाता है जो हमारे राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक है। आर्मी परेड के बाद देश के सभी राज्यों द्वारा झाँकियों के माध्यम से अपने संस्कृति और परंपरा की प्रस्तुति की जाती है। इसके बाद, भारतीय वायु सेना द्वारा हमारे राष्ट्रीय झंडे के रंगों (केसरिया, सफेद, और हरा) की तरह आसमान से फूलों की बारिश की जाती है।

इस दिन स्कूल-कॉलेजों में भी विद्यार्थी परेड, खेल, नाटक, भाषण, नृत्य, गायन, निबंध लेखन, सामाजिक अभियानों में मदद के द्वारा, स्वतंत्रता सेनानियों के किरदार निभा कर आदि बहुत सारी क्रियाओं द्वारा इस उत्सव को मनाते है। इस दिन हर भारतीय को अपने देश को शांतिपूर्णं और विकसित बनाने के लिये प्रतिज्ञा करनी चाहिये। और अंत में हर विद्यार्थी मिठाई और नमकीन लेकर खुशी-खुशी अपने घर को रवाना हो जाता है।

गणतंत्र दिवस पर निबंध 5 (300 शब्द)

भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में जाना जाता है जो कि भारत के लोगों द्वारा बेहद खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य होने के महत्व को सम्मान देने के लिये इसको मनाया जाता है जो 26 जनवरी 1950 में भारत के संविधान के लागू होने के बाद घोषित किया गया था। इसे ब्रिटीश शासन से भारत की ऐतिहासिक आजादी को याद करने के लिये मनाया जाता है। इस दिन को भारत सरकार द्वारा पूरे देश में राजपत्रित अवकाश के रुप में घोषित किया गया है। इसे पूरे भारत वर्ष में विद्यार्थीयों द्वारा स्कूल, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में मनाया जाता है।

भारत सरकार हर साल राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करती है जिसमें इंडिया गेट पर खास परेड का आयोजन होता है। अल-सुबह ही इस महान कार्यक्रम को देखने के लिये लोग राजपथ पर इकट्ठा होने लगते है। इसमें तीनों सेनाएँ विजय चौक से अपनी परेड को शुरु करती है जिसमें तरह-तरह अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रदर्शन किया जाता है। आर्मी बैंड, एन.सी.सी कैडेट्स और पुलिस बल भी विभिन्न धुनों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करते है। राज्यों में भी इस उत्सव को राज्यपाल की मौजूदगी में बेहद शानदार तरीके से मनाया जाता है।

भारत में आजादी के बाद “विविधता में एकता” के अस्तित्व को दिखाने के लिये देश के विभिन्न राज्य भी खास झाँकियों के माध्यम से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रगति को प्रदर्शित करते है। लोगों द्वारा अपनी तरफ का लोक नृत्य प्रस्तुत किया जाता है साथ ही गायन, नृत्य और वाद्य यंत्रों को बजाया जाता है। कार्यक्रम के अंत में तीन रंगों(केसरिया, सफेद, और हरा) के फूलों की बारिश वायु सेना द्वारा की जाती है जो आकाश में राष्ट्रीय झंडे का चिन्ह् प्रदर्शित करता है। शांति को प्रदर्शित करने के लिये कुछ रंग-बिरंगे गुब्बारों को आकाश में छोड़ा जाता है।


 

गणतंत्र दिवस पर निबंध 6 (400 शब्द)

हमारी मातृभूमि भारत लंबे समय तक ब्रिटीश शासन की गुलाम रही जिसके दौरान भारतीय लोग ब्रिटीश शासन द्वारा बनाये गये कानूनों को मानने के लिये मजबूर थे, भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा लंबे संघर्ष के बाद अंतत: 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। लगभग ढाई साल बाद भारत ने अपना संविधान लागू किया और खुद को लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में घोषित किया। लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिनों के बाद 26 जनवरी 1950 को हमारी संसद द्वारा भारतीय संविधान को पास किया गया। खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक, गणराज्य घोषित करने के साथ ही भारत के लोगों द्वारा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाने लगा।

भारत में निवास कर रहे लोगों और विदेश में रह रहे भारतीयों के लिय गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाना सम्मान की बात है। इस दिन की खास महत्वता है और इसमें लोगों द्वारा कई सारे क्रिया-कलापों में भाग लेकर और उसे आयोजित करके पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। इसका बार-बार हिस्सा बनने के लिये लोग इस दिन का बहुत उत्सुकता से इंतजार करते है। गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी एक महीन पहले से ही शुरु हो जाती है और इस दौरान सुरक्षा कारणों से इंडिया गेट पर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है जिससे किसी तरह की अपराधिक घटना को होने से पहले रोका जा सके। इससे उस दिन वहाँ मौजूद लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाती है।

पूरे भारत में इस दिन सभी राज्यों की राजधानीयों और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी इस उत्सव पर खास प्रबंध किया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति दवारा झंडा रोहण और राष्ट्रगान के साथ होता है। इसके बाद तीनों सेनाओं द्वारा परेड, राज्यों की झाकियोँ की प्रदर्शनी, पुरस्कार वितरण, मार्च पास्ट आदि क्रियाएँ होती है। और अंत में पूरा वातावरण “जन गण मन गण” से गूँज उठता है।

इस पर्व को मनाने के लिये स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी बेहद उत्साहित रहते है और इसकी तैयारी एक महीने पहले से ही शरु कर देते है। इस दिन विद्यार्थीयों अकादमी में, खेल या शिक्षा के दूसरे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिये पुरस्कार, इनाम, तथा प्रमाण पत्र आदि से सम्मान किया जाता है। पारिवारिक लोग इस दिन अपने दोस्त, परिवार,और बच्चों के साथ सामाजिक स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर मनाते है। सभी सुबह 8 बजे से पहले राजपथ पर होने वाले कार्यक्रम को टी.वी पर देखने के लिये तैयार हो जाते है। इस दिन सभी को ये वादा करना चाहिये कि वो अपने देश के संविधान की सुरक्षा करेंगे, देश की समरसता और शांति को बनाए रखेंगे साथ ही देश के विकास में सहयोग करेंगे।

 

सम्बंधित जानकारी:

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस पर भाषण

गणतंत्र दिवस पर कविता

गणतंत्र दिवस परेड

राष्ट्र ध्वज


Previous Story

मातृ दिवस निबंध

Next Story

विभिन्न उत्सवों पर निबंध

Republic Day honours the date on which the Constitution of India came into effect on 26 January 1950 replacing the Government of India Act (1935) as the governing document of India.[1]

The Constitution was adopted by the Indian Constituent Assembly on 26 November 1949, and came into effect on 26 January 1950 with a democratic government system, completing the country's transition towards becoming an independent republic. 26 January was chosen as the Republic day because it was on this day in 1930 when Declaration of Indian Independence (Purna Swaraj) was proclaimed by the Indian National Congress as opposed to the Dominion status offered by British Regime.

History of Republic Day[edit]

India achieved independence from British Raj on 15 August 1947 following the Indian independence movement noted for largely peaceful non-violent resistance and civil disobedience led by Mahatma Gandhi. The independence came through the Indian Independence Act 1947 (10 & 11 Geo 6 c 30), an Act of the Parliament of the United Kingdom that partitioned British India into the two new independent Dominions of the British Commonwealth (later Commonwealth of Nations).[2] India obtained its independence on 15 August 1947 as a constitutional monarchy with George VI as head of state and the Earl Mountbatten as governor-general. The country, though, did not yet have a permanent constitution; instead its laws were based on the modified colonial Government of India Act 1935. On 28 August 1947, the Drafting Committee was appointed to draft a permanent constitution, with Dr B R Ambedkar as chairman. While India's Independence Day celebrates its freedom from British Rule, the Republic Day celebrates the coming into force of its constitution. A draft constitution was prepared by the committee and submitted to the Assembly on 4 November 1947.[3] The Assembly met, in sessions open to public, for 166 days, spread over a period of two years, 11 months and 18 days before adopting the Constitution. After many deliberations and some modifications, the 308 members of the Assembly signed two hand-written copies of the document (one each in Hindi and English) on 24 January 1950. Two days later, it came into effect throughout the whole nation.

Celebrations[edit]

The main Republic Day celebration is held in the national capital, New Delhi, at the Rajpath before the President of India. On this day, ceremonious parades take place at the Rajpath, which are performed as a tribute to India; its unity in diversity and rich cultural heritage.

Delhi Republic Day parade[edit]

Main article: Delhi Republic Day parade

Delhi Republic Day parade is held in the capital, New Delhi. Commencing from the gates of the Rashtrapati Bhavan (the President's residence), Raisina Hill on Rajpath past the India Gate, this event is the main attraction of India's Republic Day Celebrations lasting three days. The parade showcases India's Defence Capability, Cultural and Social Heritage.[4]

Nine to twelve different regiments of the Indian Army in addition to the Navy, and Air Force with their bands march past in all their finery and official decorations. The President of India who is the Commander-in-Chief of the Indian Armed Forces, takes the salute. Twelve contingents of various para-military forces of India and other civil forces also take part in this parade.[5]

Beating Retreat[edit]

Main article: Beating Retreat

The Beating Retreat ceremony is held after officially denoting the end of Republic Day festivities. It is conducted on the evening of 29 January, the third day after the Republic Day. It is performed by the bands of the three wings of the military, the Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force. The venue is Raisina Hill and an adjacent square, Vijay Chowk, flanked by the North and South block of the Rashtrapati Bhavan (President's Palace) towards the end of Rajpath.[6]

The Chief Guest of the function is the President of India who arrives escorted by the (PBG), a cavalry unit. When the President arrives, the PBG commander asks the unit to give the National Salute, which is followed by the playing of the Indian National Anthem, Jana Gana Mana, by the Army. The Army develops the ceremony of display by the massed bands in which Military Bands, Pipe and Drum Bands, Buglers and Trumpeters from various Army Regiments besides bands from the Navy and Air Force take part which play popular tunes like Abide With Me, Mahatma Gandhi's favourite hymn, and Saare Jahan Se Achcha at the end.[7][8][9]

Gallery[edit]

Republic Day parade chief guest[edit]

Since 1950, India has been hosting head of state or government of another country as the state guest of honour for Republic Day celebrations in New Delhi. During 1950–1954, Republic Day celebrations were organised at different venues (like Irwin Stadium, Kingsway, Red Fort and Ramlila Grounds). It was only starting 1955 when the parade in its present form was organised at Rajpath.[10] The guest country is chosen after a deliberation of strategic, economic and political interests. During 1950s–1970s, a number of NAM and Eastern Bloc countries were hosted by India. In 1968 and 1974, India played host to two countries on the same Republic Day.

This list is incomplete; you can help by expanding it.

Notes[edit]

1.^ On each of these occasions, Lady Edwina Mountbatten from United Kingdom was also the official guest for the parade.[63][64]
2.^Duke of EdinburghPrince Philip also accompanied Queen Elizabeth II during the parade.[65]
3.^ Danish Prime Minister attended Republic Day in Madras (Chennai).[66]
4.^ No invitations were sent out possibly due to the demise of Prime MinisterLal Bahadur Shastri on 11 January 1966 in Tashkent. The new government headed by Indira Gandhi was sworn on 24 January 1966 (only two days before the Republic Day).[67]
5.^ For the first time, the President of India (S. Radhakrishnan) could not take the salute at the Republic Day parade due to ill-health.[68] Zahir Shah arrived on 28 January.[69]
6.^ Attended only the Beating Retreat[70][71]

See also[edit]

References[edit]

President Rajendra Prasad(in the horse-drawn carriage) readies to take part in the first Republic Day parade on Rajpath, New Delhi, in 1950.
Countries invited as chief guests for the Republic Day parade. Erstwhile Yugoslavia (twice invited) has not been depicted in the map.

  5 times (France, UK)

  4 times (Bhutan, Russia/USSR)

  Thrice (Indonesia, Mauritius)

  Twice (Brazil, Japan, Nepal, Nigeria, Pakistan, Singapore,Phillipines Sri Lanka, Thailand, Vietnam)

  Once

  Uninvited

0 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *